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नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..?

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..?

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की अपने ज़िन्दगी का हर ख़्वाब तेरे से जोड़ के रखा हुआ है।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद है तुझसे..? की हर बार मैं तुझे सिर्फ मेरा बनाना चाहा पर तू कभी सिर्फ मेरा ना बन्न सका।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद है तुझसे..? की तेरे साथ होते हुए भी कई बार मैं अकेला ही रह जाता हूँ।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तेरी हर गलतियों देखने सुनने के बाद भी तुझे माफ़ करता रहा ।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू एक दिन मेरा दिल दुखना बंद कर देगी ।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू एक दिन मेरा दर्द मेरी बातों मेरी तकलीफ़ को समझोगी ।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू एक दिन मेरा प्यार समझेगी और सिर्फ मुझे समझेगी ।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू मेरी उम्मीद समझेगी जो मैंने तुझसे लगा रखें हैं ।


नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू मुझे उसकी याद कभी आने नहीं देगी । 

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू अपना बिता हुआ कल मेरे नाम से जोड़ेगी अब ये कैसे उम्मीद कर लू की तू कभी भूल पएगी उन्हें ?

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? तूने ही कहा था ना की अगर कभी उनका नाम वापस मेरे सामने लोगी तो मैं समझ जाऊं की तू मुझसे प्यार नहीं करती तेरा प्यार कभी सच्चा नहीं था ? तो क्या मैं ये सच मान लूँ की तेरा प्यार झूठा हैं या मैं ये मान लूँ की मेरे प्यार में शयद वो बात ही नहीं जिसके सहारे तू तुन्हे भुला सके..? ।

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की ये उम्मीद तो कभी ना थी की तू मेरा नाम उससे जोड़ेगी ।

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? मुझमे और सहन शक्ती नहीं हैं ये क्यों नहीं समझती तुम ।

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? मुझे उम्मीद हैं की तू मेरे मर जाने के बाद ये बात ज़रूर समझेगी मुझे कितनी तक़लीफ़ होती हैं तेरी छोटी छोटी गलतियों से..? 

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हैं तुझसे..? की तू मुझे कभी नहीं समझ सकती बस इसी उम्मीद में हूँ की तू जल्दी बड़ी हो जएगी और मेरी बातो को समझेगी ।

नहीं पता क्यों इतनी उम्मीद हेैं तुझसे ? अब तो नहीं पता क्यों लगता हैं इस उम्मीद में सिर्फ मेरी उम्मीद ही टूटेगी फिरसे । #vedprakashbhoi #vlyb

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