जीवन में परिश्रम
जीवन भी हलवे की तरह है, जिसे आप पुर्ण परिश्रम से बेहतर बनाने की कोशिश करते है, भले ही खाने वाले के अनुसार स्वाद में कुछ कमी हो पर परिश्रम करते - करते जीवन और हलवे में स्वाद आ ही जाता है,
बस ज़रूरत है तो थोड़े दृढ़निश्चय और एकाग्रता की सफलता देर से ही सही पर प्राप्त ज़रूर होगी।
- 📝 वेद प्रकाश भोई
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