नया साल और पुरानी यादें..
हर साल की तरह इस नए साल का पहला दिन भी बीत चुका है। मगर मन अब भी वहीं पुरानी यादों से जूझ(ग्रस्त)रहा है। अब बीते समय के हिसाब से खुद का मूल्यांकन करता हूं तो अजीब सा एहसास महसूस करता हूँ। जीवन में कुछ भी निश्चित नहीं है।
यहां हार या जीत आपके वश में नहीं है। अगर आपके हांथो में कुछ है तो वो सिर्फ़ आपकी मेहनत है। अब मुझसे अधिक उल्लास और ख़ुश हुआ नहीं जाता या हो नहीं पाता। शायद इसी लिये जो मैं चाहता हूं वह मिलता नहीं है या जिसे चाहा वो मिला नहीं। इसकी और भी कई वजह हो सकती है। जैसे मेरा खुद को माफ न कर पाना, जिसके कारण शायद मेरा दिल दूसरों को भी माफ नहीं कर पा रहा है। ये ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार किसी पैट शॉप के पींजरे में कैद पंछी, दूसरे पंछी को क़ैद देख आज़ाद कराने के खोखले ख़्याल पाले हुए हैं। सच्चाई से दूर बहुत दूर...
यहां हार या जीत आपके वश में नहीं है। अगर आपके हांथो में कुछ है तो वो सिर्फ़ आपकी मेहनत है। अब मुझसे अधिक उल्लास और ख़ुश हुआ नहीं जाता या हो नहीं पाता। शायद इसी लिये जो मैं चाहता हूं वह मिलता नहीं है या जिसे चाहा वो मिला नहीं। इसकी और भी कई वजह हो सकती है। जैसे मेरा खुद को माफ न कर पाना, जिसके कारण शायद मेरा दिल दूसरों को भी माफ नहीं कर पा रहा है। ये ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार किसी पैट शॉप के पींजरे में कैद पंछी, दूसरे पंछी को क़ैद देख आज़ाद कराने के खोखले ख़्याल पाले हुए हैं। सच्चाई से दूर बहुत दूर...
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